Wednesday, July 15, 2026

का आजु-काल्ह के पुरस्कार-आधारित शिक्षा भ्रष्टाचार के मानसिक जड़ हऽ?


का आजु-काल्ह के पुरस्कार-आधारित शिक्षा भ्रष्टाचार के मानसिक जड़ हऽ?

गुरुकुल से किंडरगार्टन तक: शिक्षा, संस्कार आ भ्रष्टाचार पर एगो वैचारिक विमर्श

— एगो मौलिक विचार आ शोध-परिकल्पना

लेखक: G. D. Pandey

भ्रष्टाचार पर बरिसन से बहस होत आवत बा। एकरा कारन में गरीबी, लालच, कमजोर कानून, राजनीतिक दखलंदाजी, प्रशासनिक ढिलाई, सामाजिक गैर-बराबरी आ नैतिक पतन नियर कयन गो कारन गिनावल जाला। बाकिर हमार मानल बा कि एह सभके पाछे एगो अइसनो कारन हो सकेला, जेकरा पर जेतना गंभीरता से विचार होखे के चाहीं, ओतना ना भइल बा—शुरुआती शिक्षा प्रणाली।

ई लेख कौनो साबित भइल नतीजा के दावा ना करेला। ई एगो मौलिक वैचारिक परिकल्पना (Hypothesis) हऽ, जेकरा के हम शिक्षा-शास्त्री, मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्री, दार्शनिक आ नीति-निर्माता लोगन के विचार खातिर सोझा रखत बानी।

का आजु-काल्ह के पुरस्कार-आधारित शिक्षा भ्रष्टाचार के मानसिक जड़ हऽ?

का आजु-काल्ह के पुरस्कार-आधारित शिक्षा भ्रष्टाचार के मानसिक जड़ हऽ? गुरुकुल से किंडरगार्टन तक: शिक्षा, संस्कार आ भ्रष्टाचार पर एगो वैचारिक व...