28 सितंबर — शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जयंती
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास खाली लड़ाई, आंदोलन आ राजनीतिक समझौता के इतिहास ना ह। ई ओह अनगिनत नौजवानन के कहानी भी ह, जे अपना जिनगी के सबसे सुंदर आ महत्वपूर्ण समय देश के आजादी खातिर समर्पित कर दिहलन।
ओही नौजवानन में भगत सिंह के स्थान बहुत खास बा।
भगत सिंह के नाम सुनते ही हमरा सभ के सामने एगो जवान चेहरा उभर के आवेला—सिर पर टोपी, चेहरा पर आत्मविश्वास आ आँख में अइसन संकल्प, जे ब्रिटिश साम्राज्य के विशाल सत्ता के सामने झुके से इंकार कर दिहलस।
बाकिर भगत सिंह के खाली एगो साहसी क्रांतिकारी के रूप में देखल उनका व्यक्तित्व के छोट कर देला।
ऊ खाली बम-पिस्तौल के भाषा समझे वाला नौजवान ना रहलें। ऊ गंभीर पाठक, लेखक, पत्रकार, राजनीतिक विचारक आ सामाजिक बदलाव के समर्थक भी रहलें।