Sunday, October 4, 2026

भगत सिंह: विचार, संघर्ष आ शहादत - एगो अइसन जीवन जे आजो सवाल पूछेला

28 सितंबर — शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जयंती

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास खाली लड़ाई, आंदोलन आ राजनीतिक समझौता के इतिहास ना ह। ई ओह अनगिनत नौजवानन के कहानी भी ह, जे अपना जिनगी के सबसे सुंदर आ महत्वपूर्ण समय देश के आजादी खातिर समर्पित कर दिहलन।

ओही नौजवानन में भगत सिंह के स्थान बहुत खास बा।

भगत सिंह के नाम सुनते ही हमरा सभ के सामने एगो जवान चेहरा उभर के आवेला—सिर पर टोपी, चेहरा पर आत्मविश्वास आ आँख में अइसन संकल्प, जे ब्रिटिश साम्राज्य के विशाल सत्ता के सामने झुके से इंकार कर दिहलस।

बाकिर भगत सिंह के खाली एगो साहसी क्रांतिकारी के रूप में देखल उनका व्यक्तित्व के छोट कर देला।

ऊ खाली बम-पिस्तौल के भाषा समझे वाला नौजवान ना रहलें। ऊ गंभीर पाठक, लेखक, पत्रकार, राजनीतिक विचारक आ सामाजिक बदलाव के समर्थक भी रहलें।

अंग पर तिल के महत्त्व : माथा / ललाट पर तिल

 

अंग पर तिल के महत्त्व

माथा / ललाट पर तिल

भारतीय सामुद्रिक शास्त्र (Samudrika Shastra) आ लोक-परंपरा में शरीर पर मौजूद अलग-अलग चिन्ह, रेखा आ तिल के अपना-अपना पारंपरिक महत्त्व बतावल गइल बा। माथा भा ललाट भी एह तरह के अध्ययन के एगो महत्त्वपूर्ण हिस्सा मानल जाला।

ललाट पर तिल के अर्थ बतावत समय खाली ई ना देखल जाला कि तिल दाहिना ओर बा कि बायाँ ओर, बल्कि ओकर ठीक जगह, आकार, रंग आ आसपास के अंगन से ओकर स्थिति के भी ध्यान में रखल जाला।

1. माथा के दाहिना ओर तिल

सामुद्रिक शास्त्र से जुड़ल पारंपरिक मान्यता के अनुसार, माथा के दाहिना ओर मौजूद तिल के बुद्धिमत्ता, काम करे के क्षमता, सफलता आ आर्थिक स्थिति से जोड़ के देखल जाला।

लोक-मान्यता के अनुसार, अइसन व्यक्ति में आपन योग्यता आ मेहनत के सहारे आगे बढ़े के प्रवृत्ति हो सकेला। कुछ आधुनिक सामुद्रिक व्याख्या में एह तिल के धन-संपन्नता आ काम में सफलता से भी जोड़ल गइल बा।

हालाँकि, “धन हमेशा बढ़त रही” भा “व्यक्ति निश्चित रूप से धनी होई” जइसन बात के निश्चित भविष्यवाणी ना मानल जाव।

Wednesday, July 15, 2026

का आजु-काल्ह के पुरस्कार-आधारित शिक्षा भ्रष्टाचार के मानसिक जड़ हऽ?


का आजु-काल्ह के पुरस्कार-आधारित शिक्षा भ्रष्टाचार के मानसिक जड़ हऽ?

गुरुकुल से किंडरगार्टन तक: शिक्षा, संस्कार आ भ्रष्टाचार पर एगो वैचारिक विमर्श

— एगो मौलिक विचार आ शोध-परिकल्पना

लेखक: G. D. Pandey

भ्रष्टाचार पर बरिसन से बहस होत आवत बा। एकरा कारन में गरीबी, लालच, कमजोर कानून, राजनीतिक दखलंदाजी, प्रशासनिक ढिलाई, सामाजिक गैर-बराबरी आ नैतिक पतन नियर कयन गो कारन गिनावल जाला। बाकिर हमार मानल बा कि एह सभके पाछे एगो अइसनो कारन हो सकेला, जेकरा पर जेतना गंभीरता से विचार होखे के चाहीं, ओतना ना भइल बा—शुरुआती शिक्षा प्रणाली।

ई लेख कौनो साबित भइल नतीजा के दावा ना करेला। ई एगो मौलिक वैचारिक परिकल्पना (Hypothesis) हऽ, जेकरा के हम शिक्षा-शास्त्री, मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्री, दार्शनिक आ नीति-निर्माता लोगन के विचार खातिर सोझा रखत बानी।

भगत सिंह: विचार, संघर्ष आ शहादत - एगो अइसन जीवन जे आजो सवाल पूछेला

28 सितंबर — शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जयंती भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास खाली लड़ाई, आंदोलन आ राजनीतिक समझौता के इतिहास ना ह। ई ओह अनगिनत...